Malthusius theory of population
(माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत)
माल्थस ने यह सिद्धांत 1798 में दिया जिसमें उन्होंने कहा कि किस तरह से जनसंख्या और खाद्य सामग्री के बीच अंतर विद्यमान है जिसमें की जनसंख्या में वृद्धि खाद्य सामग्री की तुलना में बहुत तेजी से हो रही है।
सिद्धांत की मान्यताएं–
(1) प्रजनन गतिविधियों में निरंतर वृद्धि।
(2) जीवन स्तर उच्च होने से मृत्यु दर में कमी।
(3) कृषि क्षेत्र में आउटपुट में कमी, निवेश बढ़ाने पर भी उत्पादन में उतनी वृद्धि नहीं होती है यानी कि निम्न उत्पादन रहता है।
सिद्धांत की व्याख्या
माल्थस का यह सिद्धांत कहता है कि जनसंख्या में वृद्धि ज्यामितीय (1,2,4,8,16,32,……) दर से हो रही है, जबकि खाद्य सामग्री में अंकगणितीय (1,2,3,4,5,6……..) दर से हो वृद्धि रही है जिससे कि जनसंख्या व खाद्य सामग्री के बीच बहुत ही अंतर देखने को मिलता है।
जनसंख्या में बहुत तेज रफ्तार से वृद्धि हो और खाद्य पदार्थों में धीमी गति से वृद्धि हो तो इससे अनेक समस्याएं उत्पन्न होती है।
जनसंख्या एवं खाद्य सामग्री में असंतुलन
जनसंख्या में ज्यामितीय दर तथा खाद्य सामग्री में अंकगणितीय दर से वृद्धि होने से दोनों में असंतुलन देखने को मिलता है, जिसमें की निर्धनता, महामारी, भूखमरी, अकाल, बेरोजगारी, आदि समस्याएं उत्पन्न होती है।
नियंत्रण के उपाय
माल्थस ने जनसंख्या और खाद्य सामग्री के बीच असंतुलन को नियंत्रित करने के लिए दो प्रकार के प्रतिबंध बताई है।
(1) नैसर्गिक प्रतिबंध
प्राकृतिक प्रकोप जैसे अकाल, भुखमरी, महामारी, बाढ़, आदि इससे जनसंख्या नियंत्रित हो जाती है लेकिन यह बहुत ही पीड़ादायक होता है। यदि जनसंख्या में खाद्य सामग्री की अपेक्षा निरंतर वृद्धि होती रही तो इस नियंत्रण उपाय का क्रम भी चलता रहता है।
(2) निवारक प्रतिबंध
माल्थस के अनुसार नैसर्गिक प्रतिबंध अधिक कष्टदायक होता है अतः इससे बचने के लिए निवारक प्रतिबंध जैसे कि संयमित जीवन, देरी से विवाह करना तथा विवाह ही ना करना आदि द्वारा जनसंख्या को नियंत्रित करने का सुझाव दिया।
माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत की आलोचनाएं
माल्थस सिद्धांत की आलोचनाएं निम्न बिंदुओं के आधार पर की जाती है-
1- यह सिद्धान्त अंकगणितीय दर से वृद्धि तथा ज्यामितीय दर से वृद्धि को तथ्यात्मक रूप में प्रस्तुत नहीं करता है इसलिए यह दोषपूर्ण अवधारणा है।
2- भावी वैज्ञानिक एवं तकनीकी प्रगति को इस सिद्धांत में नजरअंदाज किया जाता है।
3- माल्थस कृषि उत्पत्ति हास नियम को मानता है जबकि ऐसा नहीं है।
4- माल्थस ने अपने सिद्धांत में जनसंख्या वृद्धि को नकारात्मक रूप में लिया है जबकि वास्तव में यही जनसंख्या उत्पादक जनसंख्या होती है।
5- जीवित रहने के लिए सिर्फ और सिर्फ खाद्य पदार्थ का ही होना जरूरी नहीं है जबकि अन्य आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं का होना भी आवश्यक है।
6- इस सिद्धांत में मृत्यु दर में कमी को लेकर कोई व्याख्या नहीं की जाती है।
इस तरह से माल्थस का जनसंख्या सिद्धांत की आलोचना इन आधारों में की जाती है।
आज के समय भारत में बढ़ती हुई जनसंख्या का भरण पोषण करना और पर्यावरण की गुणवत्ता को बनाए रखना तथा किसानों की गिरती हुई आमदनी भारतीय कृषि प्रणाली की प्रमुख चुनौतियां है। जिससे देश में पर्याप्त मात्रा में खाद्य आपूर्ति के साथ-साथ सर्वांगीण विकास को भी सुनिश्चित किया जा सके। भारत में पारंपरिक कृषि पद्धतियां सदियों से खाद्य उत्पादन का एक अभिन्न अंग रही है। जो समय-समय पर खाद्यान्न आपूर्ति तथा जीवन गुजर बसर का महत्वपूर्ण हिस्सा आ रहा है। भारत में अलग-अलग समय अंतराल में कृषि क्षेत्र में सुधार देखी गए है। जिसमें उन्नत तकनीक के माध्यम से उन्नत उत्पादन तथा पोषण की गुणवत्ता में सुधार की मांग हर समय रही, आज भी पोषण की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता महसूस की जाने लगी है। 21वीं सदी में भारत ने विभिन्न क्षेत्रों में शानदार प्रगति की है जिसमें कृषि क्षेत्र भी शामिल है लेकिन अर्थव्यवस्था में विद्यमान अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कृषि क्षेत्र में असंतोषजनक प्रगति है।
कहीं आप इन्हें देखना भूल तो नहीं गए।